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गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर कà¥à¤¯à¤¾ है?
गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर à¤à¤• पेय पदारà¥à¤¥ होता है, जिसे सौंफ, मà¥à¤²à¥‡à¤ ी, इलायची, कैमोमाइल, अदरक, नींबू बाम, शà¥à¤¦à¥à¤§ पानी और गà¥à¤²à¤¿à¤¸à¤°à¥€à¤¨ जैसी जड़ी-बूटियों को मिलाकर बनाया जाता है। यह बचà¥à¤šà¥‡ को होने वाली गैस की समसà¥à¤¯à¤¾ से आराम दिलाता है। यह बचà¥à¤šà¥‡ की पाचन कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को बेहतर कर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आराम देता है और गैस के साथ-साथ पेट की अनà¥à¤¯ समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं से राहत दिलाने में à¤à¥€ मदद कर सकता है। हालांकि, वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• शोध के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर शिशॠको देना सही नहीं है (1), लेकिन पारंपरिक मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤“ं के आधार पर शिशॠको गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर दिया जा रहा है। इसलिà¤, आप डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह के बाद ही शिशॠको गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर दें। हम आपको गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर से संबंधित कà¥à¤› जरूरी बातों की जानकारी इस लेख में दे रहे हैं, जिससे आपकी दà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ कà¥à¤› हद तक कम हो सकती है।
लेख के अगले à¤à¤¾à¤— में हम बता रहे हैं कि शिशॠके लिठगà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है या नहीं।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर कब देना चाहिठ?
वैसे तो जब शिशॠचिड़चिड़ा हो रहा हो, लगातार रो रहा हो, पेट में गैस की तकलीफ हो रही हो, तब उसे गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर दे सकते हैं। साथ ही धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहे कि आपका शिशॠà¤à¤• महीने से कम का न हो। à¤à¤• महीने से छोटे शिशॠके लिठगà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर देना सही नहीं है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इस दौरान शिशॠका पाचन तंतà¥à¤° संवेदनशील और कमजोर होता है, जिस कारण उसे समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है। बेहतर यही है कि अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से परामरà¥à¤¶ जरूर कर लें। डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपके शिशॠकी परेशानी को समà¤à¤•र सही राय देंगे।
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